नोटबंदी के बाद तीसरी बार बैंकिंग सेक्टर को लगा तगड़ा झटका, कीमत जान उड़ जाएंगे होश

पहले से ही संकट में चल रही बैंकिंग इंडस्‍ट्री को भारतीय रिजर्व बैंक के एक फैसले के चलते ऑटोमेटेड टेलर मशीन (ATM) फिर से कैलिब्रेट करनी होंगी। एटीएम को RBI द्वारा जारी 100 रुपये के नए नोट देने लायक बनाने हेतु कवायद पर देशभर में बैंक 100 करोड़ रुपये चुकाएंगे। नोटबंदी के बाद तीसरी बार एटीएम को कैलिब्रेट करने की जरूरत पड़ रही है। कैश लॉजिस्टिक्‍स फर्म्‍स और एटीएस सर्विस प्रोवाइडर्स ने चेतावनी दी है कि इस रीकैलिब्रेशन में समय लग सकता है। दोनों ने आरबीआई और सरकार से कहा है कि नोटों की पर्याप्‍त सप्‍लाई सुनिश्चित की जाए ताकि नकदी की कमी न हो।

नवंबर 2016 में 500 और 1,000 रुपये के नोट बंद करने के बाद आरबीआई ने 500, 2,000 और 200 रुपये के नए नोट जारी किए थे, मगर एटीएम के रीकैलिब्रेशन में समय लगने के चलते नकदी संकट पैदा हो गया था। केंद्रीय बैंक ने 19 जुलाई को लैवेंडर रंग में 100 रुपये का नया नोट जारी किया था।

केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा कि, नये मूल्य वर्ग के नोट के पृष्ठ भाग में रानी की वाव अंकित होगा जोकि भारत की सांस्कृतिक विरासत का परिचायक है। आरबीआई ने कहा कि, नोट का मूल रंग लैवेंडर है। नोट में दूसरा डिजाइन और ज्यामीतिक पैटर्न है जिसमें आगे और पीछे दोनों भाग में एक साथ संपूर्ण रंग योजना है।

हिताची पेमेंट सर्विसेज के एमडी लूनी एंटनी ने कहा कि, हमें लगता है कि नए नोटों को लेकर कवायद में 100 करोड़ रुपये से ज्‍यादा खर्च होंगे और देश के 2.4 लाख एटीएम को रीकैलिब्रेट करने में 12 महीने लग जाएंगे। चूंकि अभी 200 रुपये के नए नोट का ही रीकैलिब्रेशन पूरा नहीं हुआ है, इसलिए बिना सही योजना बनाए 100 रुपये के नोट के लिए कवायद में लंबा समय लग सकता है।

200 रुपये के नोट के लिए रीकैलिब्रेशन से बैंकों को पहले ही 100 करोड़ से ज्‍यादा के खर्च का अनुमान है। 500 और 1,000 रुपये के नए नोट जारी होने के बाद एटीएम रीकैलिब्रेशन पर बैंक पहले ही 110 करोड़ रुपये खर्च चुके हैं।

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