अलवर में अकबर के साथ कथित गौरक्षको द्वारा हमले में बड़ा खुलासा, पुलिस पर लगा बेहद गंभीर आरोप

राजस्थान के अलवर से सामने आई मॉब लिंचिंग की घटना ने प्रशासन पर सवाल खड़े कर दिए है। वही भीड़ द्वारा बढ़ते हमले और उनमे होने वाली हत्याए सुप्रीम कोर्ट के आदेश और पीएम मोदी के आग्रह के बावजूद कम नहीं हो रही है। अलवर में हुई घटना पर जहां देश की जनता में गुस्सा है वही विपक्ष भी अब सरकार को ज्यादा आक्रामक ढंग से घेरकर सवाल उठा रहा है। वही अब कथित गौरक्षाको द्वारा अकबर की मौत पर वसुंधरा सरकार की पुलिस पर सवाल उठ रहे है और एक चौका देने वाली बात सामने आई है।

दरअसल गौ-तस्करी के शक में भीड़ द्वारा एक अकबर नाम के एक व्यक्ति की हत्या कर दी गयी। यह घटना राजस्थान के अलवर जिले के रामगढ़ इलाके के एक गांव से लल्लावंडी से सामने आई, जहां शुक्रवार (20 जुलाई) की रात जब अकबर अपने साथ दो गायो को लेकर कही जा रहा था और उसी समय कुछ लोगो ने उसपर गौतास्कारी का आरोप लगाकर उसके साथ मारपीट शुरू कर दी और उसे इतना मारा की अस्पताल पहुचने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया।

अब पुलिस पर अकबर को देरी से अस्पताल ले जाने का आरोप लग रहा है। कहा जा रहा है कि अगर पुलिस जल्दी अकबर को अस्पताल ले जाती तो अकबर की जान बच सकती थी। आजतक की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस को सूचना देने और पुलिस के साथ गाड़ी में जाने वाले नवलकिशोर शर्मा ने कहा रात को एक बजे पुलिस घायल को रामगढ़ थाने में लेकर पहुंची। लेकिन अकबर का इलाज करने वाले डॉक्टरों का कहना है पुलिस उसे सुबह 3 बजे अस्पताल लेकर आई थी। नवलकिशोर शर्मा ने बताया कि पुलिस ने घायल रकबर के इलाज में न केवल ढाई से तीन घंटे की देरी की, बल्कि उसे रामगढ़ थाने ले जाकर उससे मारपीट भी की गई। वहीं उसकी मौत हुई। गौरतलब है कि खुद पुलिस ने एफआईआर में शर्मा को घटना की सबसे पहले सूचना देने वाला और मौके पर साथ ले जाने वाला बताया है। शर्मा के इस सनसनीखेज खुलासे से पूरे मामले में नया मोड़ आ गया है। उन्होंने बताया कि जब रात को घायल अकबर को थाने पर लेकर आए थे तब उनको गंभीर चोट नहीं थी और अगर चोट थी तो पुलिस ने अस्पताल में भर्ती क्यों नहीं करवाया। पुलिस अकबर को 3 बजे अस्पताल लेकर गई, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

रिपोर्ट के अनुसार नवलकिशोर शर्मा ने बताया कि पुलिस को उन्होंने करीब 12.40 बजे सूचना दे दी थी। इसके करीब दस मिनट बाद ही वे खुद पुलिस थाने पहुंचे। जहां से पुलिस टीम उसे सरकारी वाहन में साथ लेकर घटनास्थल पर पहुंची। यहां अकबर कीचड़ में सना पड़ा था। उसे कोई ऐसी गंभीर चोट नहीं थी जिससे उसकी मौत हो जाती। इसलिए पुलिस मौके से उठाकर उसे सीधे रामगढ़ पुलिस थाने ले गई। यहां कीचड़ में सने रकबर को नहलाया गया और उसके कपड़े गीले हो जाने के कारण पुलिस ने ललावंडी निवासी धर्मेंद्र यादव को भेजकर कपड़े मंगाए और वे कपड़े उसे पहनाए गए। इस दौरान थाने में उसके साथ मारपीट की गई। इसी मारपीट से अकबर की मौत हुई। नवलकिशोर शर्मा का कहना है कि करीब दो से ढाई घंटे पुलिस ने रकबर को थाने में रखा। उसकी मौत पुलिस कस्टडी में मारपीट से हुई है।

अब सवाल यह उठता है जब पुलिस अकबर को 1 बजे थाने ले गई तो अस्पताल पहुचने में दो घंटे क्यों लग गए? सवाल यह भी उठ रहा है कि जब घटनास्थल पर अकबर की हालत ज्यादा खराब नहीं थी तो पुलिस जब उसे अस्पताल ले गई तो उसकी मौत क्यों हुई? उसकी मौत के पीछे क्या कारण है?

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