25 वर्षीय व्यक्ति बना सबसे कम उम्र वाला मंत्री और भारत का युवा सोशल मीडिया पर उलझा है?

राजनीती में युवाओं का होना देश को एक नई दिशा की ओर ले जाता है. भारत में युवाओं की बात करे तो देश में युवा जनता का दुःख देखते तो है लेकिन केवल सोशल मीडिया पर कुछ राजनीतिक पार्टिया और उनकी विचारधारा की आलोचना करने को अपना कार्य समझते है। भारत में अबतक ज़्यादातर वही युवा राजनीती में सक्रिय है जिनका परिवार का राजनीतिक इतिहास रहा है और अन्य युवा राजनीती की ओर देखते ही नही। मलेशिया एक ऐसा देश है जहा दक्षिणपूर्व एशिया के सबसे कम उम्र के मंत्री है।

सय्यद सद्दीक या सय्यद सद्दीक सय्यद अब्दुल रहमान मलेशिया के अबतक के सबसे कम उम्र के व्यक्ति है जिनको मंत्री पद मिला है। विकिपीडिया से मिली जानकारी के अनुसार 6 दिसंबर वर्ष 1992 में जन्मे सय्यद सद्दीक अंतर्राष्ट्रीय इस्लामी विश्वविद्यालय मलेशिया (IIUM) की कानून की डिग्री रखते हैं और जब वह छात्र थे तो उन्होंने एशियाई ब्रिटिश संसदीय डिबेट चैम्पियनशिप में तीन बार एशिया का सर्वश्रेष्ठ स्पीकर पुरस्कार जीता। उन्होंने वर्ष 2017 मंत ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में पढने के लिए मिल रही स्कॉलरशिप को ख़ारिज कर दिया था। सय्यद ; पीपीबीएम की युवा शाखा, आर्मडा का नेता है और वह 2016 से पार्टी की स्थापना के बाद से ही इसके प्रवक्ता रहे। सद्दीक की उम्र इस समय 25 वर्ष है और उन्होंने इसी वर्ष आम चुनाव में अपना पहला चुनाव मुअर संसदिये सीट से चुनाव लड़ा था और इसमें जीत दर्ज कर वह एमपी बने। एमपी के साथ साथ वह इस समय युवा और खेल मंत्री भी है। सय्यद सद्दीक का कहना है कि देश में युवा वोटर्स पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है और उन्हें राजनीती में लाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका मन्ना है कि युवा ही देश को बदलने का दम रखते है।

मलेशियाई युवा मंत्री सद्दीक ने ब्लूमबर्ग से इंटरव्यू में युवाओं का राजनीती में में महत्त्व के बारे में कई बड़ी बाते कही। सद्दीक का कहना था कि यूथ दो चीज़ों के बारे में ही सोचता है, पहला – रहने के लिए खर्च, अच्छा खाना, अच्छा रोज़गार और अच्छा जीवन, दूसरा – उनकी आवाज़ देश बनाने की प्रक्रिया में सुनी जाए। उन्होंने इन इंटरव्यू के दौरान बताया कि यूथ चाहे तो वह अपना देश बदल सकता है और अगर यूथ वोट देगा तो किसी की सरकार भी गिर सकती है क्युकी यूथ कभी किसी पार्टी को सुप्पोर्टर नहीं होता।

वही दूसरी ओर अगर हम अपने देश की बात करे तो यहां विधायक और सांसद बनने के लिए किसी भी शख्स की आयु 25 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए, इसके बावजूद हमारे देश के युवा राजनीती के अलावा किसी भी अन्य क्षेत्रो में जाने से नहीं कतराते। भारत में युवा तीन तरह के प्रोफेशन में जाना पसंद करते है जिसमे एक्टिंग/सिंगिंग/मॉडलिंग, स्पोर्ट्स और अन्य पढ़ाई से जुड़े करियर शामिल है। लेकिन अगर राजनीती की बात की जाए तो इसमें वही युवा आते है जिनके परिवार का कोई राजनीतिक बैकग्राउंड रहा हो। देश में युवा अपना जीवन एन्जॉय करते रहते है और इस दौरान कोई दुःख में दिखा या सरकार का कोई काम बुरा लगा तो सोशल मीडिया पर उसकी आलोचना कर देते है और यही पर अपना काम ख़त्म समझते है। हालांकि युवा कभी यह नहीं सोचते कि किसी सरकार को उसके काम के ज़िम्मेदार ठहराने और किसी काम को करवाने के लिए खुद प्रदर्शन करने के बजाए खुद सरकार में आकर उसे सही ढंग से किया जाए।

अब सवाल यह उठता है कि क्या भारत का युवा मलेशियाई युवा मंत्री का उदाहरण लेकर राजनीती में सक्रिय होगा? क्या पुराने और उम्रदराज नेताओं को पीछे छोड़ भारत का युवा भारत को विकास की पटरी पर लाने और भारत को विश्वगुरु बनाने का संकल्प लेगा? क्या युवा सोशल मीडिया से हटकर ज़मीन पर कुछ कर दिखाएगा? सवाल तो बहुत है लेकिन देखना होगा क्या आने वाले समय में राजनीती में हमें यूथ दिखेगा?

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