सुने उपराष्ट्रपति की आपबीती: उपराष्ट्रपति हुए बंदरो के आतंक का शिकार, आपबीती सुन हो जाएँगे हैरान

देश की राजधानी दिल्ली में रह रहे माननीय इन दिनों बंदरों के आतंक से परेशान हैं। आलम यह है कि खुद उपराष्ट्रपति सह राज्यसभा के सभापति एम. वैंकैया नायडू ने बंदरों के आतंक पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि, मेरे घर पर भी बंदरों ने आतंक मचा रखा। उन्होंने सरकार को बंदरों के आतंक से बचाव करने के लिए उचित समाधान तलाशने को कहा।

दरअसल, बंदरों से निजात से लिए मामला संसद में उठने लगा है। इंडियन नेशनल लोकदल के सांसद रामकुमार कश्यप ने दिल्ली में बंदरों की बढ़ती संख्या और उनके आतंक का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि, बंदरों की वजह से लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। कपड़े घर के अंदर सुखाने पड़ रहे हैं ,और तो और एक बार बंदरों के एक झुंड ने सांसद पर हमला कर दिया था, इस वजह से उन्हें संसद पहुंचने में देरी हो गई थी। कपड़े फाड़ देना, पेड़ को तहस नहस कर देना, खाने का सामान छीन कर ले भागना, अचानक हमला कर घायल कर देना जैसे उनके कामों की वजह से लोगों को काफी परेशानी हो रही है।

सांसद द्वारा राष्ट्रीय राजधानी में बंदरों की बढ़ती संख्या और उनके आतंका का उपराष्ट्रपति ने भी समर्थन किया और सामाधान तलाशने को कहा। खबरों के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब दिल्ली में बंदरों के आतंक से निजात की बात की गई है। इससे पहले जनवरी 2018 में दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि यदि कोई आपातकालीन कदम नहीं उठाया गया तो हम लुटियंस दिल्ली से बाहर हो जाएंगे। कार्रवाई में देरी नहीं की जा सकती।

समस्या से निजात नहीं मिलने पर कोर्ट ने मई 2018 में एक बार फिर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि अब क्या बंदरों को ये कहें कि वो प्रजनन रोक दें और किसी को नहीं काटें। जुलाई में भी कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में बंदरों की आबादी रोज बढ़ रही है। इस पर लगाम लगाने के लिए तत्काल काम होना चाहिए। वहीं, दिल्ली सरकार ने अदालत में रखी स्टेटस रिपोर्ट में कहा था कि यहां के 25000 बंदरों को पकड़ने और उनका बंध्याकरण करने के लिए लगभग 23 करोड़ 50 लाख रुपये चाहिए।

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