कट्टर विरोधी कांग्रेस और भाजपा आये साथ, खोल दिया चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा

चुनाव आयोग की उस अधिसूचना पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए जिसमे राज्यसभा चुनावों के लिए बैलट पेपर में ‘उपरोक्त में से कोई नहीं’ (नोटा) की अनुमति दी गई है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार न्यायालय ने कहा कि नोटा की शुरुआत इसलिए की गई थी ताकि प्रत्यक्ष चुनावों में कोई व्यक्ति वोटर के तौर पर इस विकल्प का इस्तेमाल कर सके। वही इस मामले को लेकर केंद्र की मोदी सरकार और कांग्रेस एकसाथ आ गई है।

दरअसल रिपोर्ट के अनुसार प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने पिछले राज्यसभा चुनावों के दौरान गुजरात विधानसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक रहे शैलेश मनुभाई परमार की अर्जी पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा कि राज्यसभा चुनाव पहले से ही उलझन भरे हैं। चुनाव आयोग इन्हें क्यों और जटिल बनाना चाहता है। कानून किसी विधायक को NOTA के इस्तेमाल की इजाजत नहीं देता लेकिन इस नोटिफिकेशन के जरिए चुनाव आयोग विधायक के वोट ना डालने का अधिकार दे रहा है। जबकि ये उसका संवैधानिक दायित्व है तो वो NOTA का रास्ता इस्तेमाल नहीं कर सकता। हमें इस पर संदेह है कि NOTA के जरिए किसी विधायक को उम्मीदवार को वोट डालने से रोका जा सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार इस मामले पर भाजपा और कांग्रेस एक साथ आ गई। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने गुजरात कांग्रेस के चीफ व्हिप शैलेश मनुभाई परमार की याचिका का समर्थन करते हुए कहा कि नोटा का इस्तेमाल राज्यसभा चुनाव के दौरान नहीं किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार ने कहा कि नोटा का इस्तेमाल वहीं होगा जहां प्रतिनिधि जनता के द्वारा सीधे चुने जाते हैं लेकिन राज्यसभा में इसका इस्तेमाल नहीं हो सकता क्योंकि यहां प्रतिनिधि प्रत्यक्ष तौर पर नहीं चुने जाते।

वहीं जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि बैलेट बॉक्स में डालने से पहले कोई विधायक बैलेट पेपर को क्यों दिखाए? पिछले वर्ष गुजरात राज्यसभा चुनाव में NOTA के इस्तेमाल के खिलाफ गुजरात कांग्रेस की याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी करके जवाब मांगा था। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल कर कहा है कि राज्यसभा चुनाव में NOTA, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक है और ये प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों ही चुनावों पर लागू होता है। चुनाव आयोग ने अपने हलफनामें में ये भी कहा कि NOTA के खिलाफ गुजरात कांग्रेस की याचिका अदालती कार्रवाई का दुरुपयोग है। NOTA राज्यसभा चुनाव में 2014 से जारी है जबकि कांग्रेस ने 2017 में चुनौती दी।

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