हाई कोर्ट ने जताई देश के वर्तमान माहौल पर चिंता, कह दी ये बड़ी बात

वर्ष 2013 में 20 अगस्त को जब पुणे में नरेंद्र दाभोलकर मोर्निंग वाक पर निकले थे तब उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी वही पन्सारे को 16 फरवरी, 2015 में कोल्हापुर में गोली मारी गई थी, जिसके 4 दिन बाद उन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। अंधविश्वास के खिलाफ लड़ने वाले तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पन्सारे के परिजनों द्वारा दाखिल की गई एक याचिका पर टिपण्णी करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने देश के मौजूदा हालात पर चिंता जताई है।

जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार बॉम्बे हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने गुरुवार को कहा है कि देश इस वक्त बुरे दौर से गुजर रहा है, जिसमें कोई व्यक्ति स्वतंत्र होकर ना कुछ कह सकता है और ना ही घूम सकता है। जस्टिस एससी धर्माधिकारी और जस्टिस भारती डांगरे की पीठ ने इस याचिका पर टिप्पणी करते हुए ये बातें कहीं। बेंच ने कहा कि हम आज देश में एक बुरे दौर के गवाह बन रहे हैं। देश के नागरिकों को लगता है कि वो अपनी आवाज स्वतंत्र होकर और बिना किसी परेशानी के नहीं कह सकते हैं। क्या हम ऐसा दिन देखने जा रहे हैं, जब हर कोई व्यक्ति को खुलेआम बोलने और घूमने के लिए पुलिस सुरक्षा की जरुरत होगी?

रिपोर्ट के अनुसार हाईकोर्ट बेंच ने कहा कि आज देश में क्या हो रहा है? लोग आते हैं और बसों में आग लगा देते हैं, पत्थरबाजी करते हैं। ऐसा लगता है कि ये सब मुफ्त हैं? हमारी प्राथमिकताएं क्या हैं? एक देश है और एक सरकार है, कल सरकार बदल सकती है, लेकिन देश का क्या? यह करोड़ों लोगों का घर है? क्या अपने मन की बात कहने के लिए कल सभी लोगों को पुलिस प्रोटेक्शन लेनी पड़ेगी?

बता दें कि बॉम्बे हाईकोर्ट की बेंच ने दाभोलकर और पन्सारे की हत्या के मामले में केन्द्र और राज्य सरकार की जांच पर नाखुशी जाहिर करते हुए ये बातें कही हैं। नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पन्सारे के परिजनों ने कोर्ट की निगरानी में दोनों की हत्या की निष्पक्ष जांच कराने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की है। हालांकि सीबीआई और महाराष्ट्र सीआईडी की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम मामले की जांच में जुटी हैं। याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जांच एजेंसियों और महाराष्ट्र गृह मंत्रालय से इन मामलों की रिपोर्ट अदालत में पेश करने को कहा था। जब बुधवार को जांच एजेंसियों और गृह मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश तो कोर्ट ने नाराज़गी जताते हुए एजेंसियों से सवाल करते हुए पूछा कि क्या आप इसी तरह से समाज के खिलाफ हो रहे अपराधों की जांच करते हैं?

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