Home > इंटरनेशनल > फिलिस्तीनी सम्मेलन के लिए जमा हुए 80 देशों से 350 कार्यकर्ता; महात्मा गांधी के पोते भी हैं मौजूद

फिलिस्तीनी सम्मेलन के लिए जमा हुए 80 देशों से 350 कार्यकर्ता; महात्मा गांधी के पोते भी हैं मौजूद

फिलिस्तीनियों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए “पूरा कुद्स पूरे फिलिस्तीन की राजधानी” के नाम से एक 11 मार्च 2018 को लेबनान की राजधानी बैरूत में एक सम्मेलन शुरू किया गया है। इस बैठक में दुनिया के 80 देशों के 350 राजनीतिक कार्यकर्ता और गैर सरकारी संगठन फिलिस्तीनियों के साथ एकजुटता दर्शाने के लिए शामिल होंगे।

रविवार की रात को इसका उद्घाटन समारोह हुआ है, तै कार्यक्रम के अनुसार पहले एक गीत “आसेमतुत दुनिया” (संसार की राजधानी) गा जाएगा और उसके बाद विश्वविख्यात म्यूज़ीशियन जलआत आंत्ज़ेम अपना कार्यक्रम पेश करेंगे, और कार्यक्रम के अंत में चैरिटी के लिए कार्य करने वाले 10 प्रमुख लोगों और संगठनों को सम्मानित किया जाएगा।

इस कार्यक्रम की पहली बैठक सोमवार को होगी और उसमें फिलिस्तीनी जनता की मुख्य समस्याओं और चुनौतियों की समीक्षा की जाएगी। इस बैठक में जिन विषयों पर बातचीत की जाएगी वह यह हैं: कुद्स के बारे में ट्रम्प का एलान, फिलिस्तीनी कैदी, बच्चों पर ज़ायोनियों के हमले, अतिक्रमण, शरणार्थियों की समस्याएं, गाज़ा पट्टी का परिवेष्टन।

बैठकों का दूसरा दौर विश्व समुदाय के समन्वित कार्य के महत्व और फिलिस्तीन मामले में सहयोग के लिए मौजूद क्षमताओं के सही प्रयोग पर विचार विमर्श किया जाएगा।

ये भी पढ़ें:  राजस्थान: निलंबित डॉक्टर ने महात्मा गाँधी की मूर्ती को किया खंडित, पुलिस ने किया गिरफ्तार

इन बैठकों के साथ ही “फिलिस्तीन लौटो अंतर्राष्ट्रीय आंदोलन” की विस्तिरित रिपोर्ट और दुनिया में उनके कार्यक्रताओं की उपलब्धियों को बयान किया जाएगा, और बाद में उसकी कार्य क्षमताओं को और बढ़ाने की तरीकों पर बातचीत होगी।

ये भी पढ़ें:  बैरूत में फ़िलस्तीन के मुद्दे पर चौथा अन्तरराष्ट्रीय अधिवेशन

इन बैठकों के साथ ही कुछ नए संगठनों, वापसी बोर्ड, कुद्स बोर्ड, संबंधों के सामान्यीकरण विरोधी बोर्ड का अनावरण किया जाएगा।

बैठकों का यह सिलसिला मंगलवार की सुबह भी जारी रहेगा। मंगलवार को फिलिस्तीनी के मामले को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए आंदोलन औऱ उसके सभी समर्थकों को मिलाकर एक सोशल मीडिया चैनल शुरू किए जाने और आंदोलन की वार्षिक परियोजनाओं का अनावरण किया जाएगा।

बैठकों को अंत में प्राप्त हुए नतीजों को बयान करने और समापन वक्तत्व और कुछ हस्तियों के भाषणों का कार्यक्रम होगा।

बुधवार को बैठक की समाप्ति के बाद शामिल होने वाले सदस्य अधिग्रहित फिलिस्तीन की सीमा पर मौजूद गाँवों को देखने जाएंगे। विशेषकर “वापसी” की इस रैली का आरम्भ स्थर मारून अलरास नाम का वह गाँव है जहां 2011 में रैली में शामिल होने वाले बहुत से प्रदर्शनकारी शहीद हुए थे।

ये भी पढ़ें:  इज़राइली सेना की क्रूरता, फिलिस्तीनी नागरिको पर बरसाई गोलिया, पत्रकार समेत 10 लोगो की मौत

कार्यक्रम के अंत में सम्मेलन आयोजनकर्ताओं की तरफ़ से सीमावर्तीय गाँव वालों के लिए एक घोषणा पत्र पढ़ा जाएगा, ताकि फिलिस्तीनी जनता के अदिर्तीय प्रतिरोध के साथ एकजुटता दिखाई जा सके।

भारत से इस कॉन्फ्रेंस में महात्मा गांधी के पोते तुषार गांधी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मानी शंकर अय्यर, फ़िलिस्तीनी एक्टिविस्ट शुजाअत अली क़ादरी, ऑल इंडिया तंज़ीम उलमाए इस्लाम के अध्यक्ष मुफ़्ती अशफ़ाक़ हुसैन, वरिष्ठ पत्रकार अख़लाक़ उस्मानी और फ़िरोज़ मिथिबोरवाला हिस्सा ले रहे है।

भारत मे फिलिस्तीनी एकजुटता के लिए असाधारण काम करने के लिए शुजाअत अली क़ादरी को सम्मानित भी किआ गया।