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‘बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि का हल बात चीत से नहीं कोर्ट से निकलेगा’

बाबरी मस्जिद मामले को लेकर सौहार्दपूर्ण माहौल बातचीत के ज़रिये हल करने के प्रयासों को आज तगड़ा झटका लगा। आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड और एक पक्षकार इक़बाल अंसारी ने किसी भी तरह की बात चीत के ज़रिये मसले के हल से साफ़ इंकार किया और कहा की बाबरी किसी की बात चीत के ज़रिये कहीं नहीं शिफ्ट की जाएगी इस मामले में सिर्फ अदालत का फैसला ही मानेंगे।

बाबरी मस्जिद के पक्षकार स्वर्गीय हाशिम अंसारी के पुत्र इकबाल अंसारी और आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मामले में किसी भी मध्यस्थता को स्वीकारने से इंकार कर दिया है। इससे बेंगलुरु में श्रीश्री रविशंकर और मुस्लिम धर्मगुरुओं की मुहिम को झटका लगा है। इस बारे में जब इक़बाल अंसारी से बात की गयी तो उनहोंने साफ़ कहा की फार्मूला तो यह है कि मस्जिद 200 किलोमीटर दूर बनायीं जायेगी उन्होने कहा की मेरे वालिद और महंत ज्ञानदास ने भी बात की थी लेकिन मसले का हल नहीं हुआ इक़बाल अंसारी ने कहा कि अयोध्या का हिन्दू कभी कुछ नहीं कहता और न ही मुसलमान तो दूसरे क्यों अपना फार्मूला पेश कर रहे।

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उनहोंने कहा कि इसमें सियासत की ज़रुरत नहीं जो अदालत का फैसला होगा वही मन जायगा। उनहोंने कहा कि ज़ुफर फारूकी सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के चेयरमैन हैं बाबरी मसले में जाती तौर से वह कोई फैसला नहीं कर सकते यही मौलाना सलमान नदवी का मामला है वह मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य हैं बोर्ड नहीं। किसी भी बाहरी व्यक्ति को इस मामले दखल नहीं करना चाहिए बल्कि अदालत के फैसले का इंतज़ार करें।

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अयोध्या स्थित बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद के अदालत के बाहर आपसी बातचीत से सौहार्दपूर्ण समाधान के प्रयास तेज हो गये हैं। मार्च में हिंदू-मुस्लिम धर्मगुरुओं के बीच एक बैठक अयोध्या में इस संबंध में हो सकती है। विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए मौलाना सलमान हुसैनी नदवी, पूर्व आईएएस अधिकारी अनीस अंसारी, अतहर हुसैन, उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारुकी, मौलाना ईसा मंसूरी, हज कमेटी आफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन अबू बकर सहित अन्य ने बेंगलुरू में आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर से भेंट कर मामले को शीघ्र हल कराने के लिए आगे आने को कहा।

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