दिसम्बर 2, 2021
ऑक्सीजन मामला : HC ने केंद्र सरकार को फटकारा, ‘हम अपनी आंखें बंद कर लें और लोग दिल्ली में मरते रहें’

ऑक्सीजन मामला : HC ने केंद्र सरकार को फटकारा, ‘हम अपनी आंखें बंद कर लें और लोग दिल्ली में मरते रहें’

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने केंद्र सरकार से कहा कि अब बहुत हो चुका है. आप कहना चाहते हैं कि हम अपनी आंखें बंद कर लें और लोग दिल्ली में मरते रहें.

नई दिल्ली: दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी (Oxygen Shortage in Delhi) पर केंद्र सरकार (Centre Govt) की अर्जी पर दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में सुनवाई शुरु हो चुकी है. केंद्र ने हाईकोर्ट से शनिवार के आदेश को वापस लेने का अनुरोध किया है, जिसमें तुरंत दिल्ली को आवंटित 490 मेट्रिक टन ऑक्सीजन देने को कहा था. बत्रा हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की सप्लाई में देरी के चलते 8 मरीजों की मौतों पर आज (रविवार) हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया. दिल्ली HC ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह दिल्ली को तुरंत 490 मेट्रिक टन ऑक्सीजन दे, ऐसा न करने पर कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि अब बहुत हो चुका है. आप कहना चाहते हैं कि हम अपनी आंखें बंद कर लें और लोग दिल्ली में मरते रहें. पानी अब सिर से ऊपर निकल चुका है. आपने दिल्ली को 490 मेट्रिक टन ऑक्सीजन देने का वादा किया है, आप उसे पूरा करें. सोमवार को केंद्र सरकार के अफसर सुनवाई में उपस्थित रहे.

दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार दिल्ली को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं दे रही है, जबकि कुछ राज्यों में केंद्र सरकार ज्यादा ऑक्सीजन दे रही है, जिसमें मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र राज्य हैं. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है कि दिल्ली ने 700 मेट्रिक टन ऑक्सीजन की मांग नहीं की. दिल्ली सरकार ने कहा कि टैंकरों का इंतजाम केंद्र सरकार को करना है. दिल्ली सरकार ने अपनी ओर से ऑक्सीजन का इंतजाम किया है. सात टैंकरों का भी इंतजाम किया है. क्या केंद्र दिल्ली के लिए 100 मेट्रिक टन अतिरिक्त ऑक्सीजन का इंतजाम नहीं कर सकता. दिल्ली में हर मिनट ऑक्सीजन का संकट पैदा हो रहा है.

दिल्ली सरकार ने अदालत से कहा कि कल लगभग हर अस्पताल से SoS कॉल आईं. हमारे नोडल अफसर हर तरीके से काम कर रहे हैं. वो दिन-रात लगे रहते हैं. वो सुपर ह्यूमन नहीं हैं. केंद्र की ओर से SG तुषार मेहता ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि दिल्ली सरकार के नोडल अफसर काम कर रहे हैं. केंद्र ने 29 अप्रैल की शाम 6 बजे संसाधनों व टैंकर को लेकर वर्चुअल मीटिंग बुलाई थी. दिल्ली सरकार ने इसमें हिस्सा नहीं लिया. एक या दो लोगों पर इतनी जिम्मेदारी देना अच्छा प्रशासन नहीं है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि हम आरोप- प्रत्यारोप में नहीं जाना चाहते. हम बड़े मुद्दे पर हैं. हम लाखों लोगों के जीवन से संबंधित मामले पर हैं. क्या केंद्र ने एक नोटिफिकेशन नहीं निकाला है कि LG ही दिल्ली में सरकार हैं. दिल्ली में संवैधानिक योजना अलग है. इसपर केंद्र की ओर से कहा गया कि वो किसी और उद्देश्य से हैं. इससे जिम्मेदारी प्रभावित नहीं होंगी. ये सिस्टेमिक फेल्योर है. सीताराम भरतीया, वेंकेश्वरा और महाराजा अग्रसेन अस्पतालों ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि उनकी ऑक्सीजन खत्म होने वाली है. दिल्ली सरकार को हाईकोर्ट ने कहा कि वह इन अस्पतालों की समस्या देखे. केंद्र सरकार की तरफ से SG तुषार मेहता ने कहा कि ऐसा नहीं है कि ऑक्सीजन पर्याप्त नहीं है. ऑक्सीजन की आपूर्ति ठीक से संचारित हो रही है, और अगर सही तरह उपयोग की जाती है तो अंतिम मिनट के अलार्म से बचा जा सकता है.