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तो ये हैं रुपये की गिरावट के मुख्य कारण?

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भारतीय रुपया की हालत बुरी होती जा रही है और अब रुपया जनवरी 2017 से अबतक के सबसे बुरे दौर से गुज़र रहा है। इस समय रूपया 68 रूपए प्रति डॉलर के अंक से भी फिसल चुका है और इसका मुख्य कारण देश में हो रही उथल-पुथल मानी जा रही है।

मैकलाई फिनेनशियल के सीईओ और मार्किट विशेषज्ञ जमाल मैकलाई ने मीडिया से कहा कि रूपए में गिरावट कर्नाटक चुनाव के नतीजो का शुरुवाती झटका भर रहा है। जिस तरीके से कर्नाटक चुनाव के नतीजो के कारण पूरा घटनाक्रम बदला है, इसने राज्य की सियासत में अनिश्चितता को बढ़ावा दिया है।

मार्केट की बात करे तो पूरे दिन ही रुपये में गिरावट दर्ज की गई। जिस समय मार्किट खुला उस समय एक डॉलर की कीमत 68.14 रुपये थी और बंद होते समय डॉलर की कीमत 68.11 रूपए थी. इससे पहले रुपया 67.52 रूपए पर बंद हुआ था।

कर्नाटक चुनाव की बात करे तो कल नतीजे सामने आने के बाद भाजपा खुश तो हुई लेकिन यह ख़ुशी अधूरी थी। दरअसल चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर तो उभरी लेकिन बहुमत का आकड़ा न छु सकी। अब राज्य में तीन दल में सरकार बनाने की होड़ मची हुई है। इसका असर बाज़ार में भी देखने को मिला और माना जा रहा है इसके कारण भी रूपए की हालत पर असर पड़ा।

कहा जा रहा है कि रुपये को देश में चल रही उथल-पुथल के कारण ही झटके झेलने पड़ रहे है, जिसमे कच्चे तेल के बढ़ते दाम को प्रमुख कारण बताया है। एचएसबीसी की ग्लोबल रिपोर्ट में बताया गया कि बड़ी मात्रा में तेल का आयत भारत के वर्तमान बाज़ार घाटे को 2.3 प्रतिशत बढ़ा देगा वही पिछले वर्ष बाज़ार घाटा सकल घरेलु उत्पाद का करीब 1.9 फीसदी तक रहा था।

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